ॐ जय महावीर प्रभु

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॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय महावीर प्रभु, स्वामी जय महावीर प्रभु ।

कुण्डलपुर अवतारी, चांदनपुर अवतारी, त्रिशलानंद विभु ॥

सिध्धारथ घर जन्मे, वैभव था भारी ।

बाल ब्रह्मचारी व्रत, पाल्यो तप धारी ॥

आतम ज्ञान विरागी, सम दृष्टि धारी ।

माया मोह विनाशक, ज्ञान ज्योति जारी ॥

जग में पाठ अहिंसा आप ही विस्तारयो ।

हिंसा पाप मिटा कर, सुधर्म परिचारियो ॥

अमर चंद को सपना तुमने परभू दीना ।

मंदिर तीन शेखर का निर्मित है कीना ॥

जयपुर नृप भी तेरे, अतिशय के सेवी ।

एक ग्राम तिन्ह दीनो, सेवा हित यह भी ॥

जल में भिन्न कमल जो घर में बाल यति ।

राज पाठ सब त्यागे, ममता मोह हती ॥

भूमंडल चंदनपुर मंदिर मध्य लसे

शांत जिनिश्वर मूरत दर्शन पाप लसे ॥

जो कोई तेरे दर पर इच्छा कर आवे ।

धन सुत्त सब कुछ पावे, संकट मिट जावे ॥

निशदिन प्रभु मंदिर में जगमग ज्योत जरे ।

हरी प्रसाद चरणों में, आनंद मूँद भरे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।