भजन करे नही पागल मन मेरो रे

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॥ पावन पाठ ॥

पागल मन मेरो रे, पागल मन मेरो रे,

भजन करे नहीं पागल मन मेरो रे.....

इना जनम में तीन पण खोया नहीं पीया एक प्याला,

फिर पछताए क्या होता है,जब काल ने घेरा,

पागल मन मेरो रे.............

पशु चाम की बने पन्हैया नौबत झड़े नगाड़ा,

मनुष चाम कोई काम नी आवे, जल कर होइ अंगारा,

पागल मन मेरो रे............

कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी मुरख कहे धन मेरा,

न धन तेरा न धन मेरा, असल जंगल का फेरा,

पागल मन मेरो रे............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।