भोले भंडारी त्रिपुरारी तेरे शीश बहे गंगा प्यारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले भंडारी त्रिपुरारी,

तेरे शीश बहे गंगा प्यारी,

माथे पे वो प्यारा चंदा सजे,

कर मध्य कमंडल है धारी,

भोले भंडारी त्रिपुरारी,

तेरे शीश बहे गंगा प्यारी ॥

गले सर्प विषैले है काले,

तन पर मृगछाला को है डाले,

डमरू जो बजाके नृत्य करे,

सब झूम उठे श्रष्टि सारी,

भोले भंडारी त्रिपुरारि,

तेरे शीश बहे गंगा प्यारी॥

नागेश निराले मतवाले,

रहे मस्त सदा पि भंग प्याले,

अविनाशी है वासी कैलाशी,

है त्रिनेत्र प्रभु गंगाधारी,

भोले भंडारी त्रिपुरारि,

तेरे शीश बहे गंगा प्यारी॥

हे शिव शंकर हे भोले प्रभु,

तेरे द्वार खड़ा क्या मांगू प्रभु,

घट घट के वासी सब जानो,

‘लहरी’ शिव भोले भंडारी,

भोले भंडारी त्रिपुरारि,

तेरे शीश बहे गंगा प्यारी ॥

भोले भंडारी त्रिपुरारी,

तेरे शीश बहे गंगा प्यारी,

माथे पे वो प्यारा चंदा सजे,

कर मध्य कमंडल है धारी,

भोले भंडारी त्रिपुरारी,

तेरे शीश बहे गंगा प्यारी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।