साडे घर जगराता माँ दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

साडे घर जगराता माँ दा,

माँ दा लख लख शुकर मनाईये,

माँ दा रज रज दर्शन पाईये,

माँ दे खुल्ले दर्शन पाईये.....

माँ दी किरपा नाल मौका खुशियाँ वाला आया,

मेहरावाली मेहर है कित्ती,

साडा भाग जगाया,

छड्ड के चिंता दुनिया दी,

हुन चित चरणा विच लाईये,

माँ दा लख लख शुकर मनाईये,

माँ दा रज रज दर्शन पाईये......

महारानी कल्याणी अपनी मुझ विच आउंदी,

फिर अपने भगता दे घर विच,

मईया रानी खुश हो जावे,

रल मिल भेंटा गाईये,

माँ दा लख लख शुकर मनाईये,

माँ दा रज रज दर्शन पाईये.....

पल ना देर लगाओ भक्तो,

मंगलो जो भी मंगना,

माँ ने अपने बच्चियां नू,

रंगा दे विच रंगना,

कहंदा रोपड़ वाला जीवन,

माँ दा लख लख शुकर मनाईये,

माँ दा रज रज दर्शन पाईये.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।