मोर मुकुट वाले घुंघराली लट वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाएंजा,

मोर मुकुट वाले घुंघराली लट वाले....

मोहन तोरे बिन चैन पड़े ना,

राह तकत मोरे थक गए नैना,

मेरी अंखियों के बीच समायेजा,

अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाएजा,

मोर मुकुट वाले घुंघराले लट वाले....

बेदर्दी तोहै दर्द ना आवे,

काहे जले पर नोन लगावे,

अपनी प्रीति की रीत निभाएजा

मोर मुकुट वाले घुंघराले लट वाले,

अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाएजा,

मोर मुकुट वाले घुंघराले लट वाले....

बांसुरी अध्रन धर मुस्काए,

वे घायल कर मेरा चैन चुराए,

आजा श्याम पिया घर आए जा,

अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाएजा,

मोर मुकुट वाले घुंघराले लट वाले....

काहे मोहे संग प्रीत लगाई,

निष्ठुर निकला तू हरजाई,

लागा प्रीत का रोग मिटाए जा,

मोर मुकुट वाले घुंघराले लट वाले,

अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाएजा,

मोर मुकुट वाले घुंघराले लट वाले....

कांधे ओढ़े कारी कमरिया,

होठों पर वाके बांस बसुरिया,

अपनी मुरली की तान सुनाई जा,

मोर मुकुट वाले घुंघराले लट वाले,

अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाएजा,

मोर मुकुट वाले घुंघराले लट वाले....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।