साईं बिन मेरा कोई नही

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॥ पावन पाठ ॥

सारे जग को देख के जाना तुम बिन मेरा कोई नही,

ठोकर खा कर हमने ये माना साईं बिन मेरा कोई नही,

झूठी है ये मोह और माया,

कोई किसी के काम ना आया,

मतलब निकल गया तो अपनों ने भी किया किनारा,

अपने तो है के पहचाना,

ठोकर खा कर हमने माना.....

कब तक झले ये काया,

सुख और दुःख की धुप और छाया,

अखिरिया में आचल देखा,

हमसे ही बिछड़ा अपना साया,

लगने लगे हर कोई,

तुम बिन अपना कोई नही,

ठोकर खा कर हमने है .....

नींद में सुंदर सवपन जगाया,

आख खुली तो जी गबराया,

अपनों ने भी किया किनारा,

कुछ नही अपना सब है पराया,

सब कुछ खो कर हमने ये जाना,

साईं बिन मेरे कोई नही.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।