दुनिया ने तेरी माया नहीं जानी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया ने तेरी माया नहीं पहचानी रे,

तूने माया अजब बनाई जिसे देख सब हर्षाये....

चंदा सूरज तारे तूने बिन बांधे ही लटकाए,

कभी धूप और कभी है सर्दी,

कभी डालता पानी रे,

दुनिया ने तेरी माया नहीं पहचानी रे.....

कुंभकरण रावण से योद्धा क्षण में तूने मार दिए,

भक्त विभीषण जैसे तूने गद्दी पर बैठार दिए,

सिया चुराई रावण ने जब लंक चढ़ी थी हानि रे,

दुनिया ने तेरी माया नहीं पहचाने रे......

मान पात सोरन सौगात ना साथ चले गए ये तेरे,

ये भक्त कहें जो दुख सहे जो रहे पाप में चौबे रे,

समय पड़ा कुछ भक्ति कर ले,

थोड़ी सी जिंदगानी रे,

दुनिया ने तेरी माया नहीं पहचानी रे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।