क्या लेकर तू आया जग में

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॥ पावन पाठ ॥

क्या लेकर तू आया जग में,

क्या लेकर तू जाएगा ॥

क्या लेकर तू आया जग में,

क्या लेकर तू जाएगा,

सोच समझ ले रे मन मूरख,

आख़िर मे पछताएगा ॥

भाई बंधु मित्र तुम्हारे,

मरघट तक संग जाएँगे,

स्वारथ के दो आँसू देकर,

लौट के घर को आएँगे,

कोई ना तेरे साथ चलेगा,

काल तुझे ले जाएगा ॥

क्या लेकर तू आया जग मे,

क्या लेकर तू जाएगा,

सोच समझ ले रे मन मूरख,

आख़िर मे पछताएगा ॥

कंचन जैसी कोमल काया,

मूरत जलाई जाएगी

जिस नारी से प्यार करा तने,

बंधन तोड़ के जाएगी,

एक महीना याद करेगी,

फिर तू याद ना आएगा॥

क्या लेकर तू आया जग मे,

क्या लेकर तू जाएगा,

सोच समझ ले रे मन मूरख,

आख़िर मे पछताएगा ॥

राजा रंक पुजारी पंडित,

सबको एक दिन जाना है,

आँख खोल कर देख बावरे,

जगत मुसाफिर खाना है,

‘पवन’ कहे सब पाप पूण्य यहीं,

अंतिम साथ निभाएगा ॥

क्या लेकर तू आया जग मे,

क्या लेकर तू जाएगा,

सोच समझ ले रे मन मूरख,

आख़िर मे पछताएगा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।