भोला मानू एहसान तुम्हारो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोला इतनॊ कर काम हमारो,

मानू एहसान तुम्हारो....

अंबर की मोहे चटक चुनरिया,

भोले जी बनवाए दीजो,

धरती जैसा लहंगा सिलवाऊ,

समुंदर की गोट लगा दीजो,

अरे या में शेषनाग नाडो,

मानू एहसान तुम्हारा,

भोला इतनॊ कर काम हमारो,

मानू एहसान तुम्हारो.....

बिन शेरे पाटी के पलका,

भोले जी बनवाए दीजो,

अंबर से वह लग ना जाए,

धरती से अधर उठा दीजो,

अरे दामन पर पोनिया कारो,

मानू एहसान तुम्हारा,

भोला इतनॊ कर काम हमारो,

मानू एहसान तुम्हारो.....

मगरमच्छ की मोए हसुलिया,

भोले जी गढ़वा दीजो,

बर्र ततिया के कुंडल,

मेरे कान में पहरा दीजो,

अरे नथनी पर बिच्छू कारो,

मानू एहसान तुम्हारा,

भोला इतनॊ कर काम हमारो,

मानू एहसान तुम्हारो.....

चंदा की बिंदी तुम मेरे माथे बीच लगा दीजो,

जितने तारे अंबर में, मेरी अंगिया में जड़वा दीजो,

अरे थोड़ी पर ध्रुव को तारो,

मानू एहसान तुम्हारा,

भोला इतनॊ कर काम हमारो,

मानू एहसान तुम्हारो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।