अंगना में तुलसा प्यारी लगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पलकों से उतारी ना जाए,

अंगना में तुलसा प्यारी लगे,

नैनों से निकाली ना जाए,

अंगना में तुलसा प्यारी लगे.....

क्या तुलसा तुम सांचे में ढाली,

क्या कोई गढ़ लाया सुनार, अंगना में तुलसा प्यारी लगे,

नैनों से निकाली ना जाए,

अंगना में तुलसा प्यारी लगे.....

ना कान्हा हम सांचे में डालें,

ना गढ़ लाया सुनार अंगना में तुलसा प्यारी लगे,

पलकों से उतारी ना जाए,

अंगना में तुलसा प्यारी लगे......

मात पिता ने जन्म दिया है,

रूप दिया भगवान, अंगना में तुलसा प्यारी लगे,

पलकों से उतारी ना जाए,

अंगना में तुलसा प्यारी लगे......

तुम तो री तुलसा अपने पीहर को जाओगी,

तो हम भी चलेंगे तुमरे साथ, अंगना में तुलसा प्यारी लगे,

पलकों से उतारी ना जाए,

अंगना में तुलसा प्यारी लगे......

जो कान्हा तुम संग चलोगे, तो हंसी करेगा संसार,

अंगना में तुलसा प्यारी लगे,

पलकों से उतारी ना जाए,

अंगना में तुलसा प्यारी लगे......

हंसी करेंगे हमरो क्या रे करेंगे,

हम तुमरे पति तुम नार अंगना में तुलसा प्यारी लगे,

पलकों से उतारी ना जाए,

अंगना में तुलसा प्यारी लगे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।