जब मोज में भोला आये डमरुँ हो मगन बजाये

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जब मोज में भोला आये,

डमरुँ हो मगन बजाये,

खोले जटाएं छाए घटाए

बदरा बरसे जम जम,

भोले रे भोले भोले बम बम…….

जेले के टोले ले संग भोले

नाँचे रे मगन मसाने में,

भंग की तरंग में अपने ही

रंग में मेला लगा ले वीराने में,

धरती आकाश हिलाए

नंदी जब नाद सुनाएं,

अरे कैलाश घुमे रे संसार झूमे रे

बाजे नगाड़े बम बम,

भोले रे भोले भोले बम बम…….

ना कोई रोके रे ना कोई टोके रे,

बम लेहरी बम बम लहरी,

क्या किसको देना है,

क्या किस से लेना है,

शिव जाने बाते ग़हरी,

शिव लीला समझ ना आये,

नित नए ये खेल रचाये,

शिव ही सजाये शिव ही सुनाये,

सांसो की ये सरगम,

भोले रे भोले भोले बम बम…….

जब मोज में भोला आये,

डमरुँ हो मगन बजाये,

खोले जटाएं छाए घटाए

बदरा बरसे जम जम,

भोले रे भोले भोले बम बम…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।