मिटे से मिटती नहीं है कर्म की लकीर रे

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सरवन जल झाड़ी लेकर भरने चला नीर रे,

चलते ही चलते पहुंचा सरयू के तीर रे......

अंधे दोनों मात पिता को कावड़ में बैठार के,

सब तीरथ करवा लाया हूं, कावड़ में बैठार के,

मिटे से मिटती नहीं है कर्म की लकीर रे,

चलते ही चलते पहुंचा सरयू के तीर रे.....

बोले दोनों मात पिता बेटा बड़ी जोर से प्यास लगी,

जल्दी से जाना सरवन लाना ठंडा नीर रे,

चलते ही चलते पूछा सरयू के तीर रे.....

अवधपुरी के राजा दशरथ खेलन चले शिकार रे,

मृग के धोखे में आकर कस के मारा तीर रे,

चलते ही चलते पहुंचा सरयू के तीर रे.....

अंधे दोनों मात पिता को पहले नीर पिलाना है,

फिर मेरे मरने का कारण सभी उनको बतलाना हैं,

रोए मरेंगे दोनों हो के अधीर रे,

चलते ही चलते पहुंचा सरयू के तीर रे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।