भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना

स्वामी भुवनेश्वरी देवी जी महाराज
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॥ पावन पाठ ॥

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना ।

अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना ॥

दल बल के साथ माया, घेरे जो मुझ को आ कर ।

तुम देखते ना रहना, झट आ के बचा लेना ॥

संभव है झंझटों में मैं तुझ को भूल जाऊं ।

पर नाथ दया कर के मुझ को ना भुला देना ॥

तुम देव मैं पुजारी, तुम इष्ट मैं उपासक ।

यह बात अगर सच है तो सच कर के दिखा देना ॥

तेरी कृपा से हमने हीरा जनम यह पाया ।

जब प्राण तन से निकले, अपने में मिला लेना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।