मिट्टी बड़ी अनमोल

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॥ पावन पाठ ॥

वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल,

मेरे वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल,

जन्म लिया इस मिट्टी में मैंने,

इसकी महिमा के क्या कहने,

पला बढ़ा सब संग खेला,

इसकी धूल में रोलम रोल,

मिट्टी बड़ी अनमोल,

वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल,

मेरे वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल.....

मिट्टी में मैंने फसल उगाई,

जिसने सबकी भूख मिटाई,

अन्नपूर्णा ऐसी है माँ जैसी,

है राजीव माँ सा इसका मोल,

मिट्टी बड़ी अनमोल,

वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल,

मेरे वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल.....

मिट्टी का मैंने मंदिर बनाया,

मंदिर में भगवान बिठाया,

आई वहाँ संतों की टोली,

बोले जिसने राम नाम के बोल,

मिट्टी बड़ी अनमोल,

वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल,

मेरे वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल......

खूब गाई कवियों ने बड़ाई,

राह जिसकी में चला सिपाही,

कर दी न्यौछावर प्राणों की बाज़ी,

दिया रक्त चरणों में तोल,

मिट्टी बड़ी अनमोल,

वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल,

मेरे वतन की मिट्टी बड़ी अनमोल......

©राजीव त्यागी नज़फगढ़ नई दिल्ली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।