मैं लाख लाख शुकर मनावा सतगुरु

पारंपरिक
अन्य गुरु वाणी साईं भजन guru-vani
॥ पावन पाठ ॥

एंज लगदा ए,एंज लगदा ए,

मेरा साईं आया घर मेरे मंजूर होया मेरा सजदा है,

मैं लाख लाख शुकर मनावा सतगुरु साईं दा,

रज रज शुकराना गावा सतगुरु साईं दा,

मेहर करी मेहरा वाले ने कुल दुनिया दे रखवाले ने,

जो परदे सबदे काज दा है,

मैं लाख लाख शुकर.....

नचदी जावा चुक चुक बावा नचा सब नु नाल नचावा,

आज रज रज जी नही रज दा ऐ,

मैं लाख लाख शुकर......

रहमत दी वरखा बरसे गी,

रूह न कोई हूँ तरसे गी,

बदल कन्कोर गरज दा है,

मैं लाख लाख शुकर.....

क्यों मस्जिद क्यों जावा मंदिर,

जद आया साईं घर अंदर,

दीदार ओहदा मेनू सजदा है,

मैं लाख लाख शुकर.....

सुन साहिल सुन गल संगता दे,

सतगुरु साईं दे भगता दी,

संदेसा दे कोई चज दा ऐ,

मैं लाख लाख शुकर....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।