मैं महलों की रहने वाली तू है भोले पर्वत वासी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरा मेरा मेल मिले ना क्या करना इस जोड़ी का,

नाथ तेरा नंदी पे चाले, तने चस्का घोड़ा गाड़ी का......

मैं महलों की रहने वाली, तू है भोले पर्वत वासी,

तेरा मेरा यूं मेल नहीं, सुनले शिव भोले कैलाशी,

ओ गोरा तू ध्यान लगा अपने भोले भंडारी का,

नाथ तेरा नंदी पे चाले, तने चस्का घोड़ा गाड़ी का......

सुनले गोरा तू बात मेरी क्यों अपनी जिद पर तू है अड़ी,

बातें करती है बड़ी-बड़ी तू जल्दी घोट दे भांग मेरी,

नखरा प्यारा लगता मुझको अपनी गोरा प्यारी का,

नाथ तेरा नंदी पे चाले, तने चस्का घोड़ा गाड़ी का......

ना घोटू भोले भांग तेरी मैं अपने पीहर चाल पड़ी,

1 दिन घोटी 2 दिन घोटी, मैं घोटत घोटत हारी गई,

ना जइयो गोरा छोड़ मने, तू छोड़ दे चस्का पीहर का,

नाथ तेरा नंदी पे चाले, तने चस्का घोड़ा गाड़ी का......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।