जय साई जी बोलो सब

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॥ पावन पाठ ॥

जय साई जी बोलो सब जय साई जी बोलो,

आउंदे जांदे बोलो सब जय साई जी बोलो,

मिलके सारे बोलो सब जय साई जी बोलो,

जय साई जी बोलो सब जय साई जी बोलो.......

जरा ज़ोर से बोलो, जय साई जी,

जरा प्यार से बोलो, जय साई जी,

जरा ऊंची बोलो, जय साई जी,

साई झोलिया भरदो, जय साई जी,

साई मेहरा कर दो, जय साई जी,

मेरी सब भगता नू, जय साई जी,

मेरी सब संगता नू, जय साई जी,

मेरी जय साई जी, जय साई जी,

जय साई जी बोलो सब जय साई जी बोलो.......

झंडीया ते लिखया, जय साई जी,

रुमाला ते लिखया, जय साई जी,

गड्डिया ते लिखया, जय साई जी,

मंदिरा ते लिखया, जय साई जी,

प्रेम से बोलो, जय साई जी,

श्रद्धा नाल बोलो, जय साई जी,

जय साई जी, जय साई जी,

जय साई जी बोलो सब जय साई जी बोलो.......

मेरे साई का द्वारा, जय साई जी,

लगे जान से प्यारा, जय साई जी,

मिटे संकट सारा, जय साई जी,

मिले सब नू सहारा, जय साई जी,

करे पार उतारा, जय साई जी,

मेरी जय साई जी, जय साई जी,

जय साई जी बोलो सब जय साई जी बोलो.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।