स्वर स्वामिनी मां

श्यामसाजन
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

स्वर स्वामिनी मां मैं तुमको रिझाऊं,

जो तुमको अराधे वही गीत गाऊं,

स्वर स्वामिनी मां.....

सा से सजा दो, मेरी वन्दना को,

रम जाए रे से, वो भाए जहां को,

ग गुनगुनाऊं सदा तेरी वाणी,

म से मैया तेरा प प्यार पाऊं,

स्वर स्वामिनी मां...

ध से तुम्हीं धन, हो ऐ स्वर की दाता,

तुम्हीं हो पिता मेरे, तुम ही हो माता,

नि से निकल जाऊं, हर कशमकश से,

मैं भी "श्याम" संगीत में मान पाऊं,

स्वर स्वामिनी मां मैं तुमको रिझाऊं,

जो तुमको अराधे वही गीत गाऊँ,

स्वर स्वामिनी मां.....

लेखक : श्यामसाजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।