तेरा रूप बड़ा विकराल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरा रूप बड़ा विकराल कालका डर लागे,

डर लागे माँ डर लागे,

बागो में तू फिरे अकेली,

तेरे खुल गये सिर के बाल,

कालका डर लागे.....

शीश मियाँ तेरे टिका सोहे,

तेरे मुह में जीबा लाल,

कालका डर लागे.....

हाथ मैया तेरे चुडा सोहे,

तेरी महंगी करे कमाल,

कालका डर लागे.....

गल मैया तेरे हरवा सोहे,

तूने पड़ी मुंड की माला,

कालका डर लागे.....

कमर मैया तेरे गाग्डी सोहे,

माँ भवसार रूप विराल,

कालका डर लागे.....

पाओ तेरे मैया पायल सोहे,

तू चले गुमत की चाल,

कालका डर लागे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।