मनमोहन कब आओगे अखियां तरस रही

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मनमोहन कब आओगे अखियां तरस रही कब दरस दिखाओगे......

मेरे हाथों में कलसा है

चलो सखी वन को चले, जहां राम जी का जलसा है,

मेरे मोहन कब आओगे, मनमोहन कब आओगे.....

मेरे हाथ में केला है,

चलो सखी वन को चले, जहां राम जी का मेला है,

मेरे मोहन कब आओगे, मनमोहन कब आओगे.....

मेरे हाथ में गीता है,

चलो सखी वन को चले, जहां राम जी की सीता है,

मेरे मोहन कब आओगे, मनमोहन कब आओगे.....

मेरे हाथ में तख्ती है,

चलो सखी वन को चले, जहां राम जी की शक्ति है,

मेरे मोहन कब आओगे, मनमोहन कब आओगे.....

मेरे हाथ में पेठा है,

सीता जी को ब्याहने चला श्री दशरथ का बेटा है,

मेरे मोहन कब आओगे, मनमोहन कब आओगे.....

मेरे हाथ में इमली है,

जनक के हल के तले सीता जी निकली हैं,

मेरे मोहन कब आओगे, मनमोहन कब आओगे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।