बहार आई कान्हा तेरी नगरी में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बहार आई कान्हा तेरी नगरी में,

सजा है फूल बंगला तेरे मंदिरों में,

तेरे मंदिरों में, तेरे मंदिरों में,

बहार आई कान्हा तेरी नगरी में.......

वृंदावन की कुंज गलिन में,

हो रही चर्चा गली गली में,

भीड़ उमड़ी कान्हा तेरी नगरी में,

बहार आई कान्हा तेरी नगरी में.......

जो मैं होती कान्हा बेला चमेली,

मेहक रहती कान्हा तेरे बंगले में,

बहार आई कान्हा तेरी नगरी में.......

जो मैं होती कान्हा काली कोयलिया,

कुक रहती कान्हा तेरे बंगले में,

बहार आई कान्हा तेरी नगरी में.......

जो मैं होती कान्हा काली बदरिया,

बरस रहती कान्हा तोरे बंगले में,

बहार आई कान्हा तेरी नगरी में.......

जो मैं होती कान्हा तेरी राधिका,

मटक रहती कान्हा तेरे बंगले में,

बहार आई कान्हा तेरी नगरी में.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।