गुरु भजन कर प्राणी

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

गुरु भजन कर प्राणी यह काया तेरी हो गई पुरानी,

राम भजन कर प्राणी यह काया तेरी हो गई पुरानी,

हरी भजन कर प्राणी यह काया तेरी हो गई पुरानी....

इस काया का कोई ना ठिकाना,

एक दिन माटी में मिल जाना,

राजा हो या रानी यह काया तेरी हो गई पुरानी,

हरी भजन कर प्राणी.....

हाड जले जैसे सूखी लकड़ियां,

मांस जले जैसे घास गठरिया,

धुआं उड़े आसमानी यह काया तेरी हो गई पुरानी,

हरी भजन कर प्राणी.....

लख चौरासी भोग के आया,

मुश्किल से तूने नर तन पाया,

इस की कदर ना जानी यह काया तेरी हो गई पुरानी,

हरी भजन कर प्राणी.....

जो तू चाहे भव से तरना,

श्री सतगुरु की ले ले सरना,

बन जा आत्मज्ञानी यह काया तेरी हो गई पुरानी,

हरी भजन कर प्राणी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।