तारो तारण हारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तारो तारण हारी

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^तारो,,, , तारण हारी xll-ll

किशन कन्हाई, तोरा नाम, xll

^तारो,,, , तारण हारी xll-ll

तारे जो, हज़ारों तुमने ll, क्या, मेरा नहीं नाम,,,

^तारो,,, , तारण हारी xll-ll

जैसी राह, मिली जग में, मैं वैसी चलती आई,

पाँच तत्त्व की, काल कोठरी, काज़ल से पुतवाई ll

कान्हा तुम पे, भी तो लगा था ll, ठग्गी, का इल्जाम,,,

^तारो,,, , तारण हारी xll-ll

चार बनाए, वैरी तूने, लड़ती फिरूँ अकेली,

कौन बचाए, दर दर भटकूँ, चादर हो गई मैली ll

तूने, भी तो द्वारका ll, डुबाए, रखो धाम,,,

^तारो,,, , तारण हारी xll-ll

पल पल बदले, खेल जगत में, पल पल बदले पासा,

तोरे सहारे, जीतना चाहूँ, जो तोड़े ना आशा ll

वचन, निभाया तूने ll, कहाया, घनश्याम,,,

^तारो,,, , तारण हारी xll-ll

किशन कन्हाई, तोरा नाम, xll

^तारो,,, , तारण हारी xll-ll

तारे जो, हज़ारों तुमने ll, क्या, मेरा नहीं नाम,,,

^तारो,,, , तारण हारी xll-ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।