दुर्गा से काली कैसे बनी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कैसे बनी कैसे बनी दुर्गा से काली कैसे बनी.....

काला चोला गोटा किनारी,

हाथों में तलवार निकाली,

रण में जाए मैया चीखन लगी, दुर्गा से काली ऐसी बनी....

मार-मार असुरों के मुंड ले आई,

उन मुंडो की माला बनाई,

माला पहन मैया नाचन लगी, दुर्गा से काली ऐसी बनी.....

मार-मार असुरों के हाथ ले आई,

उन हाथों के कंगन ले आई,

कंगना पहन मैया नाचन लगी, दुर्गा से काली ऐसेे बनी.....

मार-मार असुरों के खप्पर भर लाई,

उन खप्पर में मद्रा बनाई,

मदिरा पीकेे मैया झुमन लगी, दुर्गा से काली ऐसी बनी.....

तेरा यश वेदों ने गाया,

भक्तों ने कीर्तन में सुनाया,

जयकारों से गूंज उठी, दुर्गा से काली ऐसे बनी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।