तू ढोल बजा लाँगुरिया

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॥ पावन पाठ ॥

तू ढोल बजा लाँगुरिया,

जोगिनी लहर लहर लहरावैगी,

तू ढोल बजा लाँगुरिया,

जोगिनी लहर लहर लहरावैगी,

जोगिनी लहर लहर लहरावैगी,

तू ढोल बजा लाँगुरिया.....

जब रे ढोल पंजाबी बजैगौ,

जोगिनी सूट पहन के आवैगी,

तू ढोल बजा लाँगुरिया,

जोगिनी लहर लहर लहरावैगी,

जोगिनी लहर लहर लहरावैगी,

तू ढोल बजा लाँगुरिया.....

जब रे ढोल विदेशी बजैगौ,

जोगिनी जींस पहन के आवैगी,

तू ढोल बजा लाँगुरिया,

जोगिनी लहर लहर लहरावैगी,

जोगिनी लहर लहर लहरावैगी,

तू ढोल बजा लाँगुरिया.....

जब रे ढोल यूपी कौ बजैगौ,

जोगिनी साड़ी पहन के आवैगी,

तू ढोल बजा लाँगुरिया,

जोगिनी लहर लहर लहरावैगी,

जोगिनी लहर लहर लहरावैगी,

तू ढोल बजा लाँगुरिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।