मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,

मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे......

आसपास या को मंदिर नहीं है,

दूर कलकत्ता में जाऊं कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,

मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे......

ता ता ता ता पानी भरी रे बाल्टी,

नहावे नहीं काल का नवम कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,

मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे......

पांच रंग चुनरिया इसे नहीं भावे,

काली काली साड़ी मैं लाऊं कहां से,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,

मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे......

मोतियन माला इसे नहीं भावे,

मुंडो की माला मैं लाऊं कहां से,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,

मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे......

लाल लाल मेहंदी इसे नहीं भावे,

भाल तलवार मैं लाऊं कहां से

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,

मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे......

बजनी पायल इसे नहीं भाव में,

मोटे मोटे घुंघरू मैं लाऊं कहां से,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,

मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे......

मेवा मिष्ठान इसे नहीं भावे,

खप्पर मैं लाऊं कहां से,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे,

मंदिर जली रोशनी बुझाओ कैसे,

मेरी रूठ रही कालका मनाऊं कैसे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।