आओ नन्द लाल तरस रहे नैना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आओ नन्द लाल तरस रहे नैना,

आओ गोपाल तरस रहे नैना,

तरस रहे नैना बरस रहे नैना,

आओ नन्द लाल..........

तू है मेरा मैं हूँ तेरी,

दिव्या प्रेम से बंधी है डोरी,

तुम बिन जीवन बगिया सूनी,

लोर झरत अंखियन दिन रैना,

आओ नन्द लाल..........

झूठी दुनिया रिश्ते झूठे,

सच्चा है तो तू क्यों रूठे,

खेल के मुझ संग खेल अनूठे,

दूर हुए क्यों पास आये ना,

आओ नन्द लाल..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।