अंबे मैया को मन में बसा कर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अंबे मैया को मन में बसा कर, मां का दर्शन किए जा रहे हैं,

सीस चरणों में मां के झुका कर, खुद को अर्पण किए जा रहे हैं,

अंबे मैया को मन में बसा कर....

काले बालों की अद्भुत जटा है,

मां के मुखड़े की अनुपम छटा है,

कैसी मुस्कान मां के लबो पर,

देख उसको जिए जा रहे हैं,

अंबे मैया को मन में बसा कर....

भोली सूरत लगे मां की प्यारी,

मां की महिमा है जग से निराली,

खुद को चरणों में मां के लुटा कर,

भेट तन मन दिए जा रहे हैं,

अंबे मैया को मन में बसा कर....

मैया तुमको ही है अपना माना,

अब कहे चाहे कुछ भी जमाना,

प्रेम गंगा में डुबकी लगाकर,

भक्ति रस का पीए जा रहे हैं,

अंबे मैया को मन में बसा कर....

तेरे दर पर लगाया मां डेरा,

तेरे चरणों में जीवन है मेरा,

चरण धूलि को मस्तक लगाकर,

नतमस्तक हुए जा रहे हैं,

अंबे मैया को मन में बसा कर....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।