कुछ दे ना दे मैया अपने दीवानों को

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कुछ दे ना दे मैया अपने दीवानों को,

दो आंसू तो दे दो चरणों में बहाने को,

कुछ दे ना दे मैया अपने दीवानों को.....

ध्यानु ने बहाया था श्रीधर ने बहाया था,

इन आंसुओं से मां तेरा दर्शन पाया था,

बाकी है दो आंसू मां तुमको मनाने को,

कुछ दे ना दे मैया अपने दीवानों को......

आंसू वो खजाना है किस्मत से मिलता है,

आंसू बह जाने से मां का दिल पिघलता है,

करुणा की तू सागर अब छोड़ बहाने को,

कुछ दे ना दे मैया अपने दीवानों को.......

दुख में बह जाते हैं सुख में भी जरूरी है,

आंसू के बिना मेरी मां हर आस अधूरी है,

आंसू पूरा करते हर एक हर जाने को,

कुछ दे ना दे मैया अपने दीवानों को......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।