मैया ने दर पे बुलाया है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चलता चल चलता चल,

ऊँचे पर्वत चढ़ता चल,

चलता चल चलता चल,

ऊँचे पर्वत चढ़ता चल,

आने जाने वालो को,

जय माता दी करता चल,

आने जाने वालो को,

जय माता दी करता चल,

दिन ये मुकद्दर से आया है,

मैया ने दर पे बुलाया है,

दिन ये मुकद्दर से आया है,

मैया ने दर पे बुलाया है,

चलता चल चल चल,

ओ चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल,

कुछ बातें माता से कहनी है,

कुछ बातें माता कुछ बातें माता की सुननी है,

कुछ बातें माता से कहनी है,

कुछ बातें माता कुछ बातें माता की सुननी है,

चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल......

दुनिया की दाती का दीदार होगा,

पल में सुखी तेरा संसार होगा,

दुनिया की दाती का दीदार होगा,

पल में सुखी तेरा संसार होगा,

सृष्टि ये जिसका खेल तमाशा,

कर देगी पूरी माँ हर एक आशा,

कर देगी पूरी माँ हर एक आशा,

मुश्किल चढ़ाइयों से डरना ना,

रोना ना तुम आहें भरना ना,

चलता चल चल चल,

ओ चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल,

ऊँचे पर्वत चढ़ता चल,

चलता चल चलता चल,

ऊँचे पर्वत चढ़ता चल,

आने जाने वालो को,

जय माता दी करता चल,

आने जाने वालो को,

जय माता दी करता चल......

पर्वत पे माँ ने लगाया जो डेरा,

वो आज़माती है विश्वास तेरा,

पर्वत पे माँ ने लगाया जो डेरा,

वो आज़माती है विश्वास तेरा,

छा जाये बादल जो काले तो क्या है,

पड़ जाये पावो में छाले तो क्या है,

पड़ जाये पावो में छाले तो क्या है,

ध्यान में उसके ही खो कर के,

उसके दीवाने ही हो कर के,

चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल,

चलता चल चलता चल,

चलता चल चलता चल......

भक्तो के पिछले वो सब पाप धोती,

देती है वो ही मुरादों के मोती,

भक्तो के पिछले वो सब पाप धोती,

देती है वो ही मुरादों के मोती,

वो सच्ची मुंसिफ है इंसाफ करती,

भूले सवाली की सब माफ़ करती,

भूले सवाली की सब माफ़ करती,

उसकी दुआये ही लेने को,

श्रद्धा के कुछ फूल देने को,

चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल,

दिन ये मुकद्दर से आया है,

मैया ने दर पे बुलाया है,

चलता चल चल चल,

चलता चल चल चल......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।