सोया मनवा जगाले रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सोया मनवा जगाले रे,

सोया मनवा जगाले रे,

जगा ले रे बीती रजनी,

सोया मनवा जगाले रे,

जगाले रे बीती रजनी,

हरि को ह्रदय बसा ले रे,

बसाले रे बीती रजनी,

सोया मनवा जगाले रे,

जगाले रे बीती रजनी......

सारी दुनिया जाग गई और,

तू निद्रा में सोया,

हरि भजन का अवसर प्राणी यु ही तूने खोया,

जीवन करम कमाले रे,

कमाले रे बीती रजनी,

सोया मनवा जगाले रे,

जगाले रे बीती रजनी......

पल पल जो भी निकला जाए,

फिर नहीं हाथ में आये,

जीवन का अनमोल खजाना,

जग में लुटता जाए,

कुछ तो पूंजी बचाले रे,

बचाले रे बीती रजनी,

सोया मनवा जगा ले रे,

जगाले रे बीती रजनी......

ज्ञान का सूरज गगन में चमके,

दूर हुआ अँधियारा,

ओ झूठे सपनो के अंधे,

अब तक नहीं निहारा,

हरि ने किये उजाले रे,

उजाले रे बीती रजनी,

सोया मनवा जगाले रे,

जगाले रे बीती रजनी......

सोया मनवा जगाले रे,

सोया मनवा जगाले रे,

जगा ले रे बीती रजनी,

सोया मनवा जगाले रे,

जगाले रे बीती रजनी,

हरि को ह्रदय बसा ले रे,

बसाले रे बीती रजनी,

सोया मनवा जगाले रे,

जगाले रे बीती रजनी,

ओ जगाले रे बीती रजनी,

ओ जगाले रे बीती रजनी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।