त्वमेव माता पिता त्वमेव

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन गुरुदेव भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव,

त्वमेव बन्धु सखा त्वमेव,

त्वमेव माता च पिता त्वमेव,

त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव,

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,

त्वमेव सर्वं मम देव देव,

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,

त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।