रहिमन चुप हो बैठिये

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

रहिमन चुप हो बैठिये,

देख दिनन के फेर,

रहिमन चुप हो बैठिये,

देख दिनन के फेर,

जब निके दिन आयेंगे,

बनत न लागे देर,

बनत न लागे देर,

रहिमन चुप हो बैठिये,

देख दिनन के फेर......

कबीरा खड़ा बज़ार में,

सबकी मांगै खैर,

ना काहू से दोस्ती,

ना काहू से बैर,

ना काहू से बैर,

रहिमन चुप हो बैठिये,

देख दिनन के फेर.....

चलती चाकी देखि के,

दिया कबीरा रोय,

दिया कबीरा रोय,

दो पाटन के बीच में,

साबित बचा ना कोय,

साबित बचा ना कोय,

रहिमन चुप हो बैठिये,

देख दिनन के फेर.....

गुरु गोबिंद दोनों खड़े,

काके लागू पाय,

गुरु गोबिंद दोनों खड़े,

काके लागू पाय,

बलिहारी गुरु आपने,

गोबिंद दियो दिखाय,

गोबिंद दियो दिखाय,

रहिमन चुप हो बैठिये,

देख दिनन के फेर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।