झूठी है जग की माया तोते से बोली मैना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

झूठी है जग की माया तोते से बोली मैना,

गैरों से मतलब क्या है अपनों से बच कर रहना......

एक राम अवध के राजा उसने भी धोखा खाया,

वो मैया भी अपनी थी जिसने बनवास दिलाया,

झूठी है जग की माया.......

एक प्रेम दीवानी मीरा उसने भी धोखा खाया,

वह राणा भी अपना था प्याले में जहर मिलाया,

झूठी है जग की माया.......

एक द्रोपति नारी अबला उसने भी धोखा खाया,

वह देवर भी अपना था भरी सभा में उतारा,

झूठी है जग की माया.......

एक जनक दुलारी सीता उसने भी धोखा खाया,

वह पति भी तो अपना था जिसने बन बन भटकाया,

झूठी है जग की माया.......

एक ऋषि पत्नी थी अहिल्या उसने भी धोखा खाया,

वह पति भी तो अपना था जिसने पत्थर का बनाया,

झूठी है जग की माया.......

एक था अभिमानी रावण उसने भी धोखा खाया,

यह भैया भी अपना था जिसने सारा भेद बताया,

झूठी है जग की माया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।