यहां कोई नहीं अपना दुनिया ही बेगानी है

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॥ पावन पाठ ॥

यहां कोई नहीं अपना दुनिया ही बेगानी है,

दुनिया जिसे कहते हैं वह झूठी कहानी है,

यहां कोई नहीं अपना......

एक फूल सा बचपन था जो बीत गया सारा,

अब सारी जिंदगानी कांटो पर बितानी है,

यहां कोई नहीं अपना......

धनवान बड़े आए बलवान बड़े आए,

बाकी ना रहा कोई, ना कोई निशानी है,

यहां कोई नहीं अपना......

तूने महल बनाए थे और बाग लगाए थे,

अब छोड़ कर यह नगरी, जंगल में बितानी है,

यहां कोई नहीं अपना......

एक रोज यहां आना एक रोज वहां जाना,

आ करके चले जाना, यह रीत पुरानी है,

यहां कोई नहीं अपना......

रथ घोड़े और हाथी तेरा कोई नहीं साथी,

एक दिन तो तेरी डोली, लोगों ने उठानी है,

यहां कोई नहीं अपना......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।