तुम्हें नहीं देखा हनुमान अंगूठी कहां से लाए

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

तुम्हें नहीं देखा हनुमान अंगूठी कहां से लाए,

मेरी नहीं जान पहचान अंगूठी कहां से लाए,

तुम्हें नहीं देखा.....

ना हीं तुम्हें देखा जनकपुरी में,

ना हीं मुनियों के साथ, अंगूठी कहां से लाए,

तुम्हें नहीं देखा.....

ना हीं तुम्हें देखा अवधपुरी में,

ना हीं रघुवर के साथ, अंगूठी कहां से लाए,

तुम्हें नहीं देखा.....

ना हीं तुम्हें देखा गंगा तट पर,

ना हीं केवट के साथ, अंगूठी कहां से लाए,

तुम्हें नहीं देखा.....

ना हीं तुम्हें देखा पंचवटी पर,

ना हीं लक्ष्मण के साथ, अंगूठी कहां से लाए,

तुम्हें नहीं देखा.....

ना हीं तुम्हें देखा चित्रकूट में,

ना हीं ऋषियों के साथ, अंगूठी कहां से लाए,

तुम्हें नहीं देखा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।