मैं किस विधि दर्शन पाऊं मैया बैठी रे पहाड़ों में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं किस विधि दर्शन पाऊं मैया बैठी रे पहाड़ों में,

यहां घोड़ा चले ना गाड़ी मै कैसे आऊं रे पहाड़ों में,

मैं किस विधि दर्शन पाऊं.....

मेरे हाथ में लोटा गंगाजल,, हे मैया,

मैं किस विधि तुम्हें नहवाऊ, की मैया बैठी रे पहाड़ों में,

मैं किस विधि दर्शन पाऊं.....

मेरा हाथ में डलिया फूलों की,, हे मैया,

मैं किस विधि हार चढ़ाऊं, की मैया बैठी है पहाड़ों में,

मैं किस विधि दर्शन पाऊं.....

मेरे हाथ कटोरी केसर की,, हे मैया,

मैं किस विधि तिलक लगाऊं, की मैया बैठी है पहाड़ों में,

मैं किस विधि दर्शन पाऊं.....

मेरा हाथ में थाली मेवा की,, हे मैया,

मैं किस विधि भोग लगाऊ, की मैया बैठी है पहाड़ों में,

मैं किस विधि दर्शन पाऊं.....

मेरे हाथ चुनरिया गोटे की,, हे मैया,

मैं किसी विधि तुम्हें औड़ाऊ, की मैया बैठी है पहाड़ों में,

मैं किस विधि दर्शन पाऊं.....

मेरे हाथ में ढोलक मंझरिया, हे मैया,

मैं किसी विधि भजन सुनाऊ, की मैया बैठी है पहाड़ों में,

मैं किस विधि दर्शन पाऊं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।