जय गौरी नंदन कल्याणकारी

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जय गौरी नंदन कल्याणकारी

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जय गौरी नंदन, कल्याणकारी, भक्त जनों के, सदा हितकारी ll

शँकर के तुम, आँख के तारे, पार्वती है, माता तिहारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

जय गणपति, जय गणराजू, मंगल कर, सदा शुभकारी l

जय गज़ बदन, बुद्धि विधाता, सिद्धि बिनायक, है सुखकारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

स्वर्ण मुकुट है, नयन विशाला, माला सजे है, गले में तिहारी l

तन पितांबर, साज रहियो है, तीनों ही लोकों में, जय जय तिहारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

जय एक दन्ता, जय भगवन्ता, रिद्धि सिद्धि के, आप दातारी l

वक्रतुण्ड तेरो, शुचि सुहावन, भाल तिलक, बड़ो मन भारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

गज़ रूप तेरो, बड़ो सुहाए, गौरी नंद चार, भुजा के धारी l

मोदक भोग, सुहाए तो को, छोटो सो मूसो, तेरी सवारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बल बुद्धि, विद्या के तुम दाता, भक्तों की विगड़ी, बात सँवारी l

बुद्धि का तुमरी, तोड़ न कोई, तीनों ही लोकों में, जय जय तिहारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

जय विघन हर्ता, मंगल कर्ता, गौरजां माँ के, लाल दातारी l

नंदी भृंगी तेरी, आरती गाएँ, सारे कैलाश पे, जय जय तिहारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

पुस्तक पानी, कुठार त्रिशूलम, मोदक भोग, तुम्हें सुखकारी l

पान चढ़त है, फूल चढ़त है, मेवा और, मिश्ठान की थारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शँकर सुवन, भवानी नंदन, गौरी ललन जय, जय हो तिहारी l

रिद्धि सिद्धि तोहे, चवर ढुलावें, अति शुचि, पावन मंगलकारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बुद्धि मता की, कथा सुनाऊँ, कथा सुनाऊँ, बड़ी सुखकारी l

ध्यान लगा के, सुनना भक्तो, विगड़ी बात, बनेगी तुम्हारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कार्तिक बड़े हैं, गणेश हैं छोटे, दोनों भाइयों में, प्रेम था भारी l

पर होनी कोई, टाल न पाया, एक दिन प्रशन, उठा यह भारी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

एक विवाद, कैलाश छिड़ा था, छिड़ा विवाद, बड़ा था भारी l

कार्तिक गणेश में, कौन बड़ा है, बुद्धि मता में, कौन आगाड़ी l

जय गौरी नंदन, कल्याणकारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।