रामचरितमानस चौपाई

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रामचरितमानस एहि नामा।

सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा॥

मन करि बिषय अनल बन जरई।

होई सुखी जौं एहिं सर परई॥

रामचरितमानस मुनि भावन।

बिरचेउ संभु सुहावन पावन॥

त्रिबिध दोष दुख दारिद दावन।

कलि कुचालि कुलि कलुष नसावन॥

रचि महेस निज मानस राखा।

पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा॥

तातें रामचरितमानस बर।

धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर॥

कहउँ कथा सोइ सुखद सुहाई।

सादर सुनहु सुजन मन लाई॥

"मधुर भजन बेला" Shweta Pandey (Varanasi)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।