हरि वादा से डरियो रे मनवा

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

।दोहा।

( जिसे दुनियां ठुकरा देती है, उसे द्वार तुम्हारा मिलता है,

जिसे दुनियां नफरत करती है, उसे प्यार तुम्हारा मिलता है,

जगत प्रीत मत करियो रै मनवा जगत प्रीत मत करियो,

हो हरि वादा से डरियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियो।। )

ये जीवन दो दिन का मेला,

उड़ जाए तेरा हंस अकेला,

या पीछे मत पड़ियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियो,

जगत प्रीत मत करियो.....

इस दुनियां में कौन है तेरा,

दो दिन का दुनियां में डेरा,

गुरु चरण चित धरियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियो,

जगत प्रीत मत करियो.....

ये दुनियां तेरे काम न आवै,

क्यों दुनियां में मन भटकावे,

भव से पार उतरियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियो,

हरि वादा से डरियो रे मनवा, जगत प्रीत मत करियों.....

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।