पाकर के प्यार आपका

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॥ पावन पाठ ॥

पाकर के प्यार आपका, जीवन बदल गया,

तन का रहा न होश रे, मन भी बदल गया,

पाकर के प्यार आपका.....

संसार की हवाएं मुझको तपा रही थी,

शीतल हुआ है जीवन, जब तू बरस गया,

पाकर के प्यार आपका.....

कंगालिया बहुत थी कंगाल दिल था मेरा,

दौलत मिली है प्यार की2धनवान बन गया,

पाकर के प्यार आपका.....

था गर्दीशो में जीवन, बेहाल जिंदगी थी,

दर्शन हुआ है आपका, मौसम बदल गया,

पाकर के प्यार आपका.....

दुनियां की झाड़ियों में अटका हुआ था दामन,

स्पर्श मिला है आपका, जीवन सुधर गया,

पाकर के प्यार आपका....

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।