प्यारो घणो लागे जी नारायण

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विष्णु भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

प्यारो घणो लागे जी नारायण थांको मालासेरी दरबार,

मंदिरिया के आजु बाजू सरोवर भरिया हजार,

ऊँची ऊँची लहरें चाले ,ठण्डी चाले फुवांर॥ प्यारो.....

भांत भांत का रुक भरकड़ा पायो नही कोई पार,

कोयल मोर पपहिया बोले, बोले राग मलार॥ प्यारो.....

भोजा जी गोड़ी पर बैठा बगड़ावत सरदार,

मंदिर माही बैठी साडू माता महिमा अपरम्पार॥ प्यारो....

लंबो चोडो मंदिर थांको छोड़ा है चौबार,

एक साल में दो- दो मेला आवे लाखों नरनार॥ प्यारो ......

राती जगा और जात जड़ूला आवे रोज अपार,

चम्पा लाल मालासेरी वालो थांका गावे मंगलाचार॥

प्रजापति म्यूजिकल ग्रुप भीलवाड़ा (राज.) 89479-15979

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।