संकट हरलो मंगल करदो

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज- मन डोले मेरा तन

संकट हरलो, मंगल करदो,

प्यारे, शिव गौरा के लाल,

अब, विनती सुनलो, गणपति देवा ll

हे गणनायक, देव गजानन,

मूषक चढ़कर आओ l

हाथ जोड़कर, द्वार खड़े हैं,

अब ना देर लगाओ,

गजानन, जल्दी से तुम आओ,

आ कर के, अपने भक्तों का,

तुम जान लो, दिल का हाल,

अब, विनती सुनलो, गणपति देवा,,,

संकट हरलो, मंगल करदो,,,,,,,,

तुमको ना, बतलाएं तो हम,

अपनी किसे बताएं l

तुम ही बता दो, सिद्धि विनायक,

किसके द्वार पे जाए,

बताओ, किसको अपनी सुनाएं,

दुःख के बादल, ने घेरा हमें,

संकट का, फैला जाल,

अब, विनती सुनलो, गणपति देवा,,,

संकट हरलो, मंगल करदो,,,,,,,,,

संकटहर्ता, संकट काटो,

चारों तरफ तेरा राज l

कर दो अब, खुशियों की वर्षा,

हे गणपति महाराज,

हमारे, पूरण कर दो काज,

सबके पूरण, तुम काम करो,

जग में है, तेरी मिसाल,

अब, विनती सुनलो, गणपति देवा,,,

संकट हरलो, मंगल करदो,,,,,,,,,

टूट रही है, आस की डोरी,

डोल रहा विश्वास l

अब तो हमें तुम, अपनी दया का,

दे दो प्रभु प्रसाद,

कहीं अब, टूट ना जाए आस,

जैसे भी हो, अब तो तुमको,

देवा, करना है कमाल,

अब, विनती सुनलो, गणपति देवा,,,

संकट हरलो, मंगल करदो,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।