गणपति विघन हरण सुख दाता

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गणपति विघन हरण सुख दाता

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गणपति, विघन, हरण सुख दाता xll-ll

हो,,, शिव, शंकर है, पिता तुम्हारे ll,

पार्वती है माता,,,

गणपति, विघन, हरण सुख दाता xll-ll

एक, दंत, गज़ बदन तुम्हारा ll

रवि, समान, कुंडल चमकारा ll

सुन्दर सूँड सुहाता,,,

गणपति, विघन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

फ़ूल, हार, ग़ल मोतियन माला ll

केसर, तिलक, विराजत भाला ll

मोदक भोग लगाता,,,

गणपति, विघन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

शंख, गदा, त्रिशूल विराजे ll

रूप, देखकर, मन मत लागे ll

पूर्ण पुर्ख विधाता,,,

गणपति, विघन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

जन, अनाथ की, बेनती मानो l

सब, भक्तों की, बेनती मानो l

मोहे, अपना, सेवक जानो l

सबको, अपना, सेवक जानो l

तेरी भक्ति करूँ दिन राता,,,

गणपति, विघन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।