ऐसे मेरी मैया जी का डेरा है

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पर्वतों का घेरा है

जैसे चांद तारों में ऐसे मेरी मैया जी का डेरा है,

मेरी मैया जी का डेरा है, मेरी मैया जी का डेरा है,

पर्वतों का घेरा है......

छाई हरियाली है....-2

मैया जी के मंदिर की कैसी शान निराली है,

कैसी शान निराली है, कैसी शान निराली है,

पर्वतों का घेरा है.....

लंम्बी लम्बी कतारे है....-2

मैया जी के दर्शन को सारे हाथ पसारे है,

सारे हाथ पसारे है, सारे हाथ पसारे है,

पर्वतों का घेरा है.....

माँ के चरणों मे रहते है....-2

सारे तारे गिन गिन के जय माता दी कहते है,

जय माता दी कहते है, जय माता दी कहते है,

पर्वतों का घेरा है.....

ऐसी मेरी मईया है....-2

हर लेती दुख लखेया करे सुख की छईयाँ है,

करे सुख की छईयाँ है, करे सुख की छईयाँ है,

पर्वतों का घेरा है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।