सुपने च वेखेया मैं द्वार माई दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुपने च वेखेया मैं द्वार माई दा,

रज रज कित्ता मैं दीदार माई दा,

ऊंचेयां सिहांसना ते बैठी महारानी सी,

चरणा नु धोन्दा गंगा जी दा पानी सी,

फुला नाल होया सी शृंगार माई दा,

सुपने च वेखेया मैं द्वार माई दा,

रज रज कित्ता मैं दीदार माई दा,

रज रज कित्ता मैं दीदार माई दा,

सुपने च वेखेया मैं द्वार माई दा.......

रहमता दा द्वारा जदो मैया जी ने खोलेया,

गुफा दे नजारेया ने मेरा मन मोह लया,

लाया मैं जयकारा लख वार माई दा,

सुपने च वेखेया मैं द्वार माई दा,

रज रज कित्ता मैं दीदार माई दा,

रज रज कित्ता मैं दीदार माई दा,

सुपने च वेखेया मैं द्वार माई दा.......

सुपने च वेखेया मैं द्वार माई दा,

रज रज कित्ता मैं दीदार माई दा,

ऊंचेयां सिहांसना ते बैठी महारानी सी,

चरणा नु धोन्दा गंगा जी दा पानी सी,

फुला नाल होया सी शृंगार माई दा,

सुपने च वेखेया मैं द्वार माई दा,

रज रज कित्ता मैं दीदार माई दा,

रज रज कित्ता मैं दीदार माई दा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।