तेरे भवन पे लेके मुझको तेरा प्यार चला आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे भवन पे लेके मुझको तेरा प्यार चला आया,

तूने दी आवाज मैं तेरे द्वार चला आया,

मैया जी तूने दी आवाज मैं तेरे द्वार चला आया,

तेरा हुकुम हुआ मेरा सारा परिवार चला आया,

तूने दी आवाज मैं तेरे द्वार चला आया,

मैया जी तूने दी आवाज मैं तेरे द्वार चला आया,

तेरे भवन पे लेके मुझको तेरा प्यार चला आया.......

पहुंच गई मुझसे भी पहले द्वार तेरे फरियाद मेरी,

द्वार तेरे फरियाद मेरी, द्वार तेरे फरियाद मेरी,

आते आते आ ही गई आखिर तुझको याद मेरी,

आखिर तुझको याद मेरी, आखिर तुझको याद मेरी,

लाल तेरा करने तेरा दीदार चला आया,

दीदार चला आया,

तेरा हुकुम हुआ मेरा सारा परिवार चला आया,

तूने दी आवाज मैं तेरे द्वार चला आया,

मैया जी तूने दी आवाज मैं तेरे द्वार चला आया,

तेरे भवन पे लेके मुझको तेरा प्यार चला आया......

भक्तो के जयकारों ने मुझे भवन की राह दिखा दी माँ,

भवन की राह दिखा दी माँ भवन की राह दिखा डाली,

पांव जले मेरे धूप में दो दिन रिमझिम बरखा दिखा डाली,

रिमझिम बरखा दिखा डाली, रिमझिम बरखा दिखा डाली,

झूमते गाते करते जय जयकार चला आया,

जय जयकार चला आया,

तेरा हुकुम हुआ मेरा सारा परिवार चला आया,

तूने दी आवाज मैं तेरे द्वार चला आया,

मैया जी तूने दी आवाज मैं तेरे द्वार चला आया,

तेरे भवन पे लेके मुझको तेरा प्यार चला आया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।