कर्मा वाला जनम तू पाया

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॥ पावन पाठ ॥

कर्मा वाला जनम तू पाया,

व्यर्थ गवा न पराणी चार दिन की ये जिंदगानी,

फिर तेरी ख़त्म कहानी,

माँ बेहन भी बी और बंधू झोठे है सब रिश्ते,

काल समाये का आये का कब टूटे गे सब रिश्ते,

साथ न देगा धन और सोना गल हो गी ज़ंजीर पुरानी,

कर्मा वाला जनम तू पाया......

हाथ गुनाहों से रंगे है और हुआ मन काला,

लाख छुपा कर पाप करे तू देखे गा देखने वाला,

दे न धोखा खुद को बन्दे कर न नादानी,

कर्मा वाला जनम तू पाया.....

लाख चुरासी कट ना सके गी सब न हो गुरु का साथ,

नाम प्याला पे के बंदे हो गा यम से आजाद,

मेहता गुरु है अमृत सरोवर मन निर्मल श्याम सुहानी,

कर्मा वाला जनम तू पाया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।