नच नच के शगन मनाऊंणा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नच नच नच नच के शगन मनाऊंणा,

मेरी माँ ने आऊंणा,

नच नच नच नच के शगन मनाऊंणा,

मेरी माँ ने आऊंणा,

सारे बोलो जय माता दी,

मिलके बोलो जय माता दी,

रज रज के दर्शन पाऊँणा, मेरी माँ ने आऊंणा,

नच नच के शगन मनाऊंणा, मेरी माँ ने आऊंणा......

आज होनी ऐ मौज फकीरा दी....-2

अज खुलनी वार तकदीरा दी.....-2

ओदे पैर असी चुम लैणे,

ओदे पैर असी चुम लैणे, जेहड़ी दाती पीर है पीरा दी,

सारे बोलो जय माता दी,

मिलके बोलो जय माता दी,

रज रज के दर्शन पाऊँणा, मेरी माँ ने आऊंणा,

नच नच के शगन मनाऊंणा, मेरी माँ ने आऊंणा......

भक्ति दा चोला पा लैणा.....-2

दिल माँ दे रंग रंगवा लैना....-2

जिदा ध्यान देवते करदे ने,

जिदा ध्यान देवते करदे ने, ओदे दर ते शीश झुका लैणा,

सारे बोलो जय माता दी,

मिलके बोलो जय माता दी,

रज रज के दर्शन पाऊँणा, मेरी माँ ने आऊंणा,

नच नच के शगन मनाऊंणा, मेरी माँ ने आऊंणा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।