अम्बे रानी खैरा वंडे सबदे भरे भंडारे

पारंपरिक
माता दुर्गा गुरु वाणी दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अम्बे रानी खैरा वंडे सबदे भरे भंडारे,

अम्बे रानी खैरा वंडे सबदे भरे भंडारे,

मेला मेला मेला लग्गा वैष्णों दे द्वारे,

मेला मेला मेला लग्गा वैष्णों दे द्वारे,

अम्बे रानी खैरा वंडे सबदे भरे भंडारे......

चारे पासे खुशियां वाली हुंदी ऐ बरसात ऐ,

हुंदी ऐ बरसात ऐ, हुंदी ऐ बरसात ऐ,

सज-धज के भगत ने आये एना दी क्या बात ऐ,

एना दी क्या बात ऐ, एना दी क्या बात ऐ,

नचण गावंण मौज मनावन विच खुशी दे सारे,

नचण गावंण मौज मनावन विच खुशी दे सारे,

मेला मेला मेला लग्गा वैष्णों दे द्वारे,

मेला मेला मेला लग्गा वैष्णों दे द्वारे,

अम्बे रानी खैरा वंडे सबदे भरे भंडारे......

ढोलक छैणे चिमटा टल्लीयां टल्ल कई खड़काउंदे ने,

टल्ल कई खड़काउंदे ने, टल्ल कई खड़काउंदे ने,

माँ दे नाम बोल जयकारे जावण खुशी मनाउंदे ने,

जावण खुशी मनाउंदे ने, जावण खुशी मनाउंदे ने,

जयकारा शेरांवाली दा, जयकारा मेहरावाली दा,

जयकारा शेरांवाली दा, जयकारा मेहरावाली दा,

ओ सारे बोलो जय माता दी,

ओ रल के बोलो जय माता दी,

पीछे वाले बोलो जय माता दी,

ओ अग्गे वाले बोलो जय माता दी,

ओ भगत वी बोलण बोलो जय माता दी,

सारे बोलण बोलो जय माता दी,

हत्थ उते करके बोलो जय माता दी,

हत्थ उते करके बोलो जय माता दी,

जयकारा शेरांवाली दा, जयकारा मेहरावाली दा,

जयकारा ज्योतांवाली दा, जयकारा लाटावाली दा,

माँ दे नाम बोल जयकारे जावण खुशी मनाउंदे ने,

माँ दे नाम हाजरी भरदे चल के आउण द्वारे,

माँ दे नाम हाजरी भरदे चल के आउण द्वारे,

मेला मेला मेला लग्गा वैष्णों दे द्वारे,

मेला मेला मेला लग्गा वैष्णों दे द्वारे,

अम्बे रानी खैरा वंडे सबदे भरे भंडारे.......

ज्योत जगा के शीश नवा के माँ नु जेडे मनाऊंदे ने,

माँ नु जेहड़े मनाऊंदे ने, माँ नु जेडे मनाऊंदे ने,

अम्बे नाम दे रंग विच रंग के जीवन सफल बनाउंदे ने,

जीवन सफल बनाउंदे ने, जीवन सफल बनाउंदे ने,

बाँह ओना दी फड़ के मैया आपे पार उतारे,

बाँह ओना दी फड़ के मैया आपे पार उतारे,

मेला मेला मेला लग्गा वैष्णों दे द्वारे,

मेला मेला मेला लग्गा वैष्णों दे द्वारे,

अम्बे रानी खैरा वंडे सबदे भरे भंडारे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।